Tuesday, October 24, 2017

तेरे असाइनमेंट्स-कम्प्यूटर और कॉलेज की पढाई.!!

मायने ज़िन्दगी के एक रात में ही बदल जाते.!
बातें करते-करते जाने कब प्यार कर हैं जाते.!!


कुछ पल की दूरी भी लगती जन्मों की दूरियाँ.!
“सागर“तभी दुनियां प्यार को नशा कहे जाती.!!



क्या खूब है जानूं तेरे कॉलेज की पढाई.!
असाइनमेंट्स और कम्प्यूटर की पढाई.!!



क्या करेगी पढ़ चौका-बर्तन ही करना.!
संभालेगी चार-पांच बच्चे करेगी लड़ाई.!!



जवानी की बहार बार-बार कहाँ मिलती.!
मानले कहना छोड़ ये मगज़ की खपाई.!!



कम्प्यूटर पड़ेगी कम्प्यूटर ही हो जायेगी.!
खुद क्या मेमोरी हार्ड-डिस्क में फँसाई.!!



उल्लू-सी रात जागती और उल्लू बनाया.!!
अब बिस्तर पर जा लेती तान गर्म रजाई.!!



चल जैसी भी’सागर‘की है दिल-ओ-जान.!!
बाद देखीं जायेगी कर लेते पहले सगाई.!!


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तेरे असाइनमेंट्स-कम्प्यूटर और कॉलेज की पढाई.!!

तुझे हक़ है मुझसे बगावत करने का…(Nazam)

तेरे घर से मेरे घर का महज़ फासला इतना.!
तेरे शहर सूरज निकल रहा यहाँ डूब चुका.!!


आप रात-रात भर जाग बतियाते रहे और जब दिल चाहे
कहें”Good Night“…


Is it fair…?


भाई क़त्ल करने की ये आदत तो रास नहीं आई…



तुझे हक़ है मुझसे बगावत करने का,
मैंने कदम-कदम मुहब्बत को रुस्वा जो किया.!
तेरे दर पर आया अक्सर तेरे शहर में,
तेरी गली आ खुदको खुदसे बेशहारा जो किया.!!
तुझे हक़ है मुझसे बगावत करने का…


प्यार में कुछ तो सजा पानी होगी,
जहाँ जख्म न मिले वहां दिल्लगी मुकम्मिल नहीं.!
रोज़ करते वादा साथ निभाने का,
क़र्ज़ तो अब उतारना होगा मुहब्बत का जो लिया.!!
तुझे हक़ है मुझसे बगावत करने का…


तेरी दुनियां से बेहतर और नहीं.
तेरे बगैर गर जीना है तो जहाँ किस काम का मेरे.!
तुझ संग सारे खवाब हकीकत,
तेरे साथ जीने-मरने का वादा खुदा से है जो किया.!!
तुझे हक़ है मुझसे बगावत करने का…



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तुझे हक़ है मुझसे बगावत करने का…(Nazam)

Don’t Worry…


जब सामने हो खूबसूरत हुस्न,
किस कमब्खत को नींद आती.!
मुक़द्दर से मिलता चाहने वाला,
‘सागर‘फिर रात दिन हो जाती.!!


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Don’t Worry…

क्या करूँ ज़िन्दगी रहनुमाई बंद कर देती.!!


तुझसे नाराज़ नहीं ज़रा भी,
क्या करूँ मेरी आदत ही कुछ ऐसी है.!



जिसे भी चाहता हूँ दिल से,
आगे ज़िन्दगी रहनुमाई बंद कर देती है.!!


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क्या करूँ ज़िन्दगी रहनुमाई बंद कर देती.!!

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जरुरत है एक हसीन हसीना की,
पांच फुट तीन इंच की,
कटीली-नशीली सांवली,
एम्.एसी.सी,बी.एड हो या,
कम भी चलेगी,
अमां चलेगी क्या दौड़ेगी…..


मुंडा पंजाबी है ब्रह्मण भी,
जाति-पाती का झंझट नहीं,
फिर भी अपनी हो तो अच्छा,
चौबीस से कम हो पर
उन्नीस से ज्यादा,
वरना माँ के डण्डें में दम है ज्यादा…..


शायरी ना करती हो,
कम-से-कम सुन तो सके,
चिड़ी-छिक्के की एकल खिलाडी न,
टीम क्रिकेट की करती हो पसंद,
घर-काम में हाथ बटा दे,
प्यार से पास बिठा रोटी खिला दे…..


चक्कर लगा-लगा कर,
घर-आँगन हसीनों के,
जूतों संग पैर गिस चुके,
अब समझा जमाना बदला,
ऑनलाइन मिलता है सबकुछ,
क्यों न ऑनलाइन रिज्यूम मंगा लूँ…..


ज़िन्दगी बड़ी बेज़ार गर,
साथी मनचाहा ना मिले,
होती उसी चमन बहार,
जहाँ बागवां प्यारा मिले,
‘सागर‘ दुलारी दिला दे,
बीवी इक प्यारी दिला दे…..


Reservation Applied as par Indian Condition…


Special Discount for Firozabadies…


Post:One


Fees:Zero Rs.


Salaries:All is Yours…


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