Thursday, December 14, 2017

दुआ सलाम.!!

ना दुआ सलाम किया और ना बात,
कैसी वफ़ा की फिर उम्मीद.!


“सागर“क्यों हुस्न वाले बेवफा कहते,
क्या यही इश्क़ की तहज़ीब.!!



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दुआ सलाम.!!

कभी गीत कभी ग़ज़ल बन कागज़ पर उतरा”सागर”का दिल.!!

दीवाना है दिल घायल है दिल परवाना है,
कभी भाई बन कभी शायर कभी आशिक़ बन धड़का है दिल.!



तन्हाई में तड़पा चाहत में मुस्कुराया है,
कभी गीत कभी ग़ज़ल बन कागज़ पर उतरा”सागर“का दिल.!!



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कभी गीत कभी ग़ज़ल बन कागज़ पर उतरा”सागर”का दिल.!!

न कर पढ़ाई का बहाना .!!

न कर पढ़ाई का बहाना तू,
क्यों तड़पाती हो.!
किताबों में लिख नाम मेरा,
क्यों शर्माती हो.!!



मुहब्बत में तक़रार होती है,
नाराज़ ना रहो.!
खुदा हुस्न डबको देता इतना,
क्यों इठलाती हो.!!



दिल में गर कुछ नहीं तो नैन,
क्यों लड़ाती हो.!
क़त्ल कर अपने बीमार क्यों,
पाक कहलाती हो.!!



हुस्न अदाओं पर है नाज़ तुझे,
क्यों बहकती हो.!
जिस्म है ठंडा-ठंडा ऊपर से,
बड़ा दहकती हो.!!



“सागर“जैसा कहीं न मिलेगा,
भाव खाती हो.!
देर से आती बिन बताये फिर,
भाग जाती हो.!!



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न कर पढ़ाई का बहाना .!!