Monday, May 01, 2017

Happy Labor Day…


कितनी बड़ी विडंबना है जो मजदूर हमें अच्छे-से-अच्छा जीवन यापन करने की सुख-सुविधाएं देता है,
हम मात्र एक दिन किताबों-दफ्तरों में या सड़कों पर एक रैली निकाल अपना फर्ज पूरा समझते हैं?
अर्ज़ किया है:-




औरों का बनाता हूँ,
किन्तु खुद ही बेघर रह जाता हूँ.!
सर्दी-गर्मी-बरसात,
हर मौसम आसमाँ तले बीतता हूँ.!!
मैं मजदूर हूँ यारो,
बस एक दिन याद किया जाता हूँ…
इक आवाज़ देने पर,
जहाँ-जैसे रहूं दौड़ा चला आता हूँ.!
चंद रूपए ले कर,
नामुंमकिन को मुमकिन करता हूँ.!!
मैं मजदूर हूँ यारो,
बस एक दिन याद किया जाता हूँ…
ना रुकता ना थकता,
इंसानों में जैसे एक मशीन जैसा हूँ.!
गौर से देखो यारो,
मैं भी ज़िंदा इंसान आप जैसा हूँ.!!
मैं मजदूर हूँ यारो,
बस एक दिन याद किया जाता हूँ…
सदियों का फ़साना,
ठोकर खा फिर ठोकर खता हूँ.!
मुफ्लीज हूँ”सागर“,
तभी चंद-सिक्कों से तौला जाता हूँ.!!
मैं मजदूर हूँ यारो,
बस एक दिन याद किया जाता हूँ…



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Happy Labor Day…

MORAL…

“Never Say That I Failed 10 Times


Say That I Discovered Ten Ways That Can Cause Failure”



MORAL: “बंदा बेगैरत बन जाए पर अपनी गलती कभी ना माने”


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MORAL…

फिर भी आप लाजवाब हैं…


आप किसी से दो-चार बातें कर उससे बोलना छोड़ देते हैं,
क्यूंकि आपको लगता है आप ही श्रेष्ट हैं??
और भाषण-बाजी शुरू कर देते हैं??
कभी आप यक़ीन पर तो कभी आपसी समझ पर??
काश आप पहले खुद को परख लें तो कितना अच्छा हो??
अर्ज़ किया है:–



देखा अक्सर लोगों को बड़ी-बड़ी बातें करते,
जिन्हें खुद ही उन पर अमल करना नहीं आता.!
चले हैं दुनियां को वही सुधारने अब ‘सागर‘,
जिन्हें खुदको पहले साबित करना ही नहीं आता.!!


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फिर भी आप लाजवाब हैं…