Sunday, December 18, 2016

Beauty of Firozabad…

मिलने आना हो तो वक़्त तय कर के ही आना-जाना चाहिए,
आपकी बिन बताए आने-जाने की आदत से कितना
कष्ट होता है काश इसका इल्म होता?
अर्ज़ है:-



चुपके से आते हो और चुपके से ही चले जाते,
फ़िरोज़बाद वालिए कितना इठलाती हो.!
दूर-दूर से कहती कुछ बिन बताए भाग जाती,
करीब आओ तो जाने कितना गर्माती हो.!!


काश छोटे बच्चे होते स्कूल जा फिर से पढ़ते,
सुना है स्कूल में बहुत खूब पढ़ाती हो.!
चर्चे फ़िरोज़बाद में देखा नहीं कोई ऐसा टीचर,
शहर में अपना मुकाम अलग बनाती हो.!!


पीली कुरती उत्ते चिटा कोर्ट शराबी नैना वालिए,
बिखरा खुश्बू जवां भंवरों को तड़पाती हो.!
‘सागर‘सा ना मिलेगा चाहने वाला ख़याल रखना,
तीखे नैना वालिए क्यूँ सितम ढहाती हो.!!


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Beauty of Firozabad…

They’re Better…

सबसे अच्छे तो ये पंछी हैं,
जब चाहें जहाँ आ-जा सकते.!
फिर कहता है दिल’सागर‘,
हमने खुद ही तो काँटे चुने.!!
रहते मिल अमन-चैन से,
पल-पल जीने को ना तरसते.!
हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई,
बन आपस में तो ना लड़ते.!!


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Sabse Achche To Ye Panchi Hai,


Jab Chaahein Jahaan Aaa-Jaa Sakte.!


Phir Kehta Hai Dil ‘Sagar“,


Humnein Khud Hi To Kante Chune.!!


Rahte Mil Aman-Chain Se,


Pal – Pal Jeene Ko Naa Tarsate.!


Hindu-Muslim-Sikh-Isaai,


Ban Aapas Mein To Naa Ladate.!!



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They’re Better…

Streets Of Firozabad…

गलियाँ तो कहीं की हों खूबसूरत और हसीन ही होती है और ऊपर से गर महबूब के मौहल्ले / शहर की हों तो सोने पे सुहागा जैसी बात हो जाती है?
और हज़ूर फिर वो आकर कुछ यूँ फरमायें तो….


” Aap Abhi tak Firozabad ki galiyon mai h..
Kabhi humse bhi takraiye janab!! “


अर्ज़ किया है:-



ज़िंदगी गुज़र रही थी जिनको ढूंढते-ढूंढते,
वो कर रहे थे शिक़वा सारे शहर में लिख कर लिखते-लिखते.!
‘सागर‘इश्क़ निकम्मा कर देता इंसान को,
वरना टकराते ना उनसे फ़िरोज़बाद की गलियो में चलते-चलते.!!


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Zindagi Guzar Rahi Thi Jinko Dhundhate-Dhundhate,


Wo Kar Rahe The Shiqwa Saare Shahar Mein Likhkar Likhte-Likhte.!


‘Sagar‘ Ishq Nikamma Kar Deta Insaan Ko,


Warna Takraate Na Unse Firozabad Ki Galiyo Mein Chalte – Chalte.!!


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” आप अभी तक फ़िरोज़बाद की गलियों में हैं….
कभी हमसे भी टकराइए जनाब!! “


दिल अगर कुछ हो तो खुल कर कहना चाहिए,
जाने ज़िंदगी कितनी है और फिर कभी आगे
मौका दे या ना दे?



अर्ज़ है:-



टकराने की बात करते हो यार,
कहीं दिल में कुछ होने तो नहीं लगा.!
कम्बख़त मुहब्बत रोग ज़ालिम,
कहीं’सागर‘से प्यार होने तो नहीं लगा.!!


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Takraane Ki Baat Karte Ho Yaar,


Kahin Dil Mein Kuch Hone To Nahin Laga.!


Kambakhat Muhabbat Rog Zalim,


Kahin’Sagar‘Se Pyaar Hone To Nahin Laga.!!


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Streets Of Firozabad…