मिलने आना हो तो वक़्त तय कर के ही आना-जाना चाहिए,
आपकी बिन बताए आने-जाने की आदत से कितना
कष्ट होता है काश इसका इल्म होता?
अर्ज़ है:-
चुपके से आते हो और चुपके से ही चले जाते,
फ़िरोज़बाद वालिए कितना इठलाती हो.!
दूर-दूर से कहती कुछ बिन बताए भाग जाती,
करीब आओ तो जाने कितना गर्माती हो.!!
काश छोटे बच्चे होते स्कूल जा फिर से पढ़ते,
सुना है स्कूल में बहुत खूब पढ़ाती हो.!
चर्चे फ़िरोज़बाद में देखा नहीं कोई ऐसा टीचर,
शहर में अपना मुकाम अलग बनाती हो.!!
पीली कुरती उत्ते चिटा कोर्ट शराबी नैना वालिए,
बिखरा खुश्बू जवां भंवरों को तड़पाती हो.!
‘सागर‘सा ना मिलेगा चाहने वाला ख़याल रखना,
तीखे नैना वालिए क्यूँ सितम ढहाती हो.!!

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Source:: Mehfil101
Beauty of Firozabad…


