Friday, August 26, 2016

By Heart…

“कौन कम्बख़त है इस हसीन दुनियाँ को छोड़ कर जाना चाहता है.!
पर अब लगता है जाना होगा,किसी को दिया वादा निभाना होगा .!!”


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तेरे बगैर ये दुनियाँ हमें मन्जूर नहीं.!
तूँ नहीं तो ये ज़िंदगी भी क़बूल नहीं.!!


Tere Bagair Ye Duniyan Humein Manjur Nahin.!


Tun Nahin To Ye Zindagi Bhi Qabool Nahin.!!


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लोग कहते हैं कुछ लोग गम भुलाने खातिर मैखाने का साथ लेते हैं,
और अपना जी हल्का कर लेते हैं?पर क्या ये सच में मुम्मकिन है?


उसे भुलाने खातिर चाहे जितना भी पी लूँ’सागर‘.!
ज्यूँ-ज्यूँ नशा बढ़ता वो कम्बख़त और याद आता.!!


Use Bhulaane Khatir Chaahe Jitna Bhi Pee Loon ‘Sagar‘.!


Jyun-Jyun Nasha Badhta Wo Kambakht Aur Yaad Aata.!!


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बहुत शिद्दत से चाहा था उसे किसी ने बिल्कुल पागलों की माफिक,
पर हर बेवफा की भाँति उसने कभी यक़ीन ना किया !


मेरी मयियत उठने पर ज़रूर आना,
कफ़न उठा दो अश्क बहा देना.!
जल जाऊँगा जो चिता में तो देखना,
दिल के टुकड़ों पे तेरा नाम होगा.!!


Meri Maiyat Uthne Par Zarur Aana,


Kafan Utha Do Ashk Baha Dena.!


Jal Jaaun Jo Chita Mein To Dekhna,


Dil Ke Tukdon Pe Tera Naam Hoga.!!


sss


दिल टूटता है तो बस ऐसा ही कुछ ज़ज़्बा उभरता है:


वो और होंगे जिन्हें वफ़ा मिली होगी’सागर‘.!
यहाँ तो हर कदम बस धोखे ही खाए’सागर‘.!!



Wo Aur Honge Jinhein Wafa Mili Hogi ‘Sagar‘.!


Yahan To Har Kadam Bas Dhokhe Hi Khaye’Sagar‘.!!


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जब भी देखा किसी बेवफा को,
तेरी बेवफ़ाई से ज़्यादा कुछ नज़र ना आया.!
लोग चाहे समझें कुछ भी ‘सागर‘,
उससे आगे कोई और कभी नज़र ना आया.!!


Jab Bhi Dekha Kisi Bewafa Ko,


Teri Bewafai Se Jyada Kuch Nazar Na Aaya.!


Log Chahe Samjhein Kuch Bhi’Sagar‘,


Usse Aage Koyi Aur Kabhi Nazar Na Aaya.!!


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By Heart…

But Why…

कभी-कभी दिल में वो अनचाहे लम्हें याद हो आते हैं जिन्हें हम याद ही नहीं करना चाहते,
पर क्या करें कम्बख़त दिल ही तो है जाने कब-क्या सौच बैठे? ऐसी ही एक याद लफ्ज़ बन,
कागज पर बिखर आई है !
अर्ज़ है:-


कभी गैरों ने कभी अपनों ने लूटा,
हमें ज़िंदगी ने पग-पग पे लूटा.!
शिक़वा-शिक़ायत नहीं ‘सागर‘,
गम है अपना क्यूँ बन-बन लूटा.!!


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Kabhi Gairo Ne Kabhi Apno Ne Luta,


Humein Zindagi Ne Pag-Pag Pe Luta.!


Shiqawa – Shiqaayat Nahin ‘Sagar‘,


Gum Hai Apna Kyun Ban – Ban Luta.!!


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But Why…