Thursday, November 02, 2017

रहे ना रहे चिराग उल्फत के…”Dedicated”

दिल के ज़ज़्बात जब-जब लफ्ज़ बन कागज़ पर बिखरे हैं,
शायरी बन जाते,वो भी तब जब आपको 103 तक बुखार चढ़ा हो?.शायद इसी का नाम ग़ज़ल है नज़्म है…
अर्ज़ है:-



रहे ना रहे चिराग उल्फत के यूँही जलाये रखना.!
बमुश्किल मिलती वफ़ा नग्मों में सजाये रखना.!!
रहे ना रहे चिराग उल्फत के…


कभी शेर बन कभी रुबाई तो कभी ग़ज़लों में.!
साथ गुज़ारे लम्हों को लफ़्ज़ों से बसाये रखना.!!
रहे ना रहे चिराग उल्फत के…


कब मुहब्बत को आसानी से क़बूल करे दुनियां.!
बेवफा ना होना यूँही जहाँ को झुकाये हुए रखना.!!
रहे ना रहे चिराग उल्फत के…


मुहब्बत बाज़ार में नहीं निभा कर कमाई जाती.!
पाक वफ़ा निभा भटकों को राह दिखाए रखना.!!
रहे ना रहे चिराग उल्फत के…


ज़िन्दगी है यहाँ फ़लसफां हो मिट जाने के लिए.!
वक़्त कैसा भी रहे”सागर“सब को हंसाये रखना.!!
रहे ना रहे चिराग उल्फत के…


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रहे ना रहे चिराग उल्फत के…”Dedicated”

मोड़ी परेशान ग्वालियर की…

अभी कैसे दूँ जवाब ना करो तंग
अभी हमारे इम्तहान चल रहे हैं.!


बाली उम्र माना ना बहकेंगे हम,
बेश्क दिल में चिराग जल रहे हैं.!!



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मोड़ी परेशान ग्वालियर की…

सरे बाजार मेरे प्यार का सौदा किया.!!


मुहब्बत का देवता समझ मैंने प्यार तुझ संग किया,
तूने सरे बाजार जा मेरे प्यार का सौदा किया.!


हो सकता है कुछ कमी मुझ में भी रही होंगी जरूर,
मुझे ना बता सारी दुनियां में क्यों रुस्वा किया.!!


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सरे बाजार मेरे प्यार का सौदा किया.!!