तन की सुंदरता पर मरने वालों को संख्या कम नहीं है पर असली सुंदरता तो मन की होती है
विचारों की होती है! शरीर मिटता है पर आपके विचार सारी दुनियाँ याद रखती है?
विचार एक’सागर’ की धारा है जो अपने-आप में बहुत कुछ समेटे है!
आपका व्यवाहर कैसा है,दूसरों के सुख-दुख में आप कितना शामिल होते हैं,
अपनों से आपका कैसा व्यवाहर है,
आप कितने मधुर-भाषी हैं,
निसवार्थ भाव रखने वाले हैं आदि-आदि!
याद रहे आपका शरीर एक दिन आपका साथ छोड़ देगा तब दुनियाँ आपके विचारों और आपके
दूसरों के लिए किए गये कार्यों को देखेगी आपकी सुंदरता को नहीं! हाँ कुछ पल आपकी सुंदरता
का बखान ज़रूर होगा परन्तू अंत में आके विचार और स्वभाव की ही जय-जयकार होगी!
अर्ज़ है:-
जो खुदा ने बनाया उसको सलाम करो,
तन की सुंदरता के ना गुलाम बनो.!
शरीर मिटता पर आचार – विचार नहीं,
‘सागर‘बनना है तो विचारवान बनो.!!

Jo Khuda Ne Banaya Usko Salam Karo,
Tan Ki Sundarta Ke Na Gulaam Bano.!
Sharir Mitta Par Achaar-Vichaar Nahin,
‘Sagar‘Banna Hai To Vicharvaan Bano.!!
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Source:: Mehfil101
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