Saturday, December 03, 2016

A Beauty From Firozabad…(Dedicated)

कुछ शायरों का क्या है दिल हाथ में लिए फिरते हैं,जहाँ देखा बेपनहां हुस्न फिदा हो गये और लिख दी नज़्म / ग़ज़ल !! शायद दिल बस इसी काम के लिए रखते हैं?
यूँही फ़िरोज़ाबाब की गलियों में घूमते-फिरते
इक हसीन हुस्न दिख गया और ग़ज़ल अर्ज़ हो गयी:-


Dedicated To A Beautiful/Intelligent (Married) Teacher From


“Firozabad“


बेरहम बेहया हैं वो,
फिर भी क्यूँ उनसे दोस्ती की है.!
प्यार करने के क़ाबिल नहीं,
ए दिल क्यूँ उनसे मुहब्बत की है.!!


वादा पूरा करते नहीं,
फिर भी आने का कर जाते हैं.!
क्यूँ करता यक़ीन दिल,
क्यूँ आरज़ू उनकी ज़ुस्तज़ू की है.!!


प्यार करने की आदत नहीं,
आँख लड़ी है किसी से पहली बार.!
परेशान हो गया हूँ,
दिल कहता क्यूँ ऐसी दिल्लगी की है.!!


हुस्न-ए-जाना फ़िरोज़ाबाद की,
हसीनों में एक ही हसीन है.!
हसरातों की इन्हां होती नहीं,
क्यूँ’सागर‘उनकी ख्वाहिश की है.!!


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Beraham Behaya Hain Wo,


Phir Bhi Kyun Unse Dosti Ki Hai.!


Pyaar Karne Ke Qaabil Nahin,


Ey Dil Kyun Unse Muhabbat Ki Hai.!!


Waada Poora Karte Nahin,


Phir Bhi Aane Ka Kar Jaate Hain.!


Kyun Karta Yaqeen Dil,


Kyun Aarzoo Unki Zustzoo Ki Hai.!!


Pyaar Karne Ki Aadat Nahin,


Aankh Ladi Hai Kisi Se Pahali Baar.!


Pareshaan Ho Gaya Hoon,


Dil Kehta Kyun Aisi Dillagi Ki Hai.!!


Husn-e-Jaana Firozabad Ki,


Haseenon Mein Ek Hi Haseen Hai.!


Hasraton Ki Inhaan Hoti Nahin,


Kyun ‘Sagar‘ Unki Khwahish Ki Hai.!!3e27712d-9043-4302-aa8a-d4898f2ab058


Note:-


” दिल की आरज़ू है जब भी वो आयें,
पढ़ कर इठलायें-बलखायें पर नाराज़ ना हों.!
मान कर’सागर‘दीवाने की गुस्ताख़ी,
मुस्कुरायें और माफ़ कर रब्ब से सब्ब पायें.!! “


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Posted On Dec 2, 2016 10:21 AM


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A Beauty From Firozabad…(Dedicated)

Values Of Relationship…

आज जब रिश्तों को यक़ीन तोड़ते-टूटते देखता हूँ तो दिल में अजीब सा दर्द होता है!
क्यूँ अपने रिश्तों को जतलाने की ज़रूरत आन पड़ी
है?क्या हमारी मोरल वॅल्यूस कमजोर पड़ गयी हैं? ये वो मुल्क है जहाँ दोस्त की बहन-बेटी को अपनी बेटी-बहन,सहेली के भाई को भाई,चाचा-ताई,दादा-दादी,नाना-नानी,
यहाँ तक की पड़ोस के रिश्तों को भी एहमियत
दी जाती रही है पर आज?
अर्ज़ है:-



दिल के रिश्तों को तरज़ू में ना तौलिए,
बाज़ार में बिकता कोई सामान नहीं.!
माना आज रिश्तों का मौल ज़्यादा नहीं,
फिर भी इंसान से आगे कुछ और नहीं.!!


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Dil Ke Rishton Ko Tarazu Mein Na Tauliye,


Bazaar Mein Bikta Koyi Saamaan Nahin.!


Maana Aaj Rishton Ka Maul Jyaada Nahin,


Phir Bhi Insaan Se Aage Kuch Aur Nahin.!!


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Values Of Relationship…

My Promise…

जब बार-बार समझाने के बाद भी माशुका ना यक़ीन करे और ना ही इक़रार करे तो इसके सिवा
कोई और रास्ता ही नहीं बचता !
अर्ज़ है:-



इक तुझको ही चाहा है तेरी माँ की कसम,
ख़ाता तेरी कसम तो मानती ना उन के सर की कसम.!
नकद से मूल प्यारा होता तुमनें सुना होगा,
कर इक़रार वरना दूँगा होने वाली अपनी सास की कसम.!!


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My Promise…

तेरा गैर संग बात करना गंवारा.!!

भूली-बिसरी यादों के कारवाँ से गुज़रे हुए वक़्त में लिखी एक बेदील के लिए ग़ज़ल अर्ज़ है:-



तेरा गैर संग बात करना गंवारा नहीं इस दिल को.!
बस इतना जानता इस धरती पर आई हो मेरे लिए.!!


क्यूँ और इन झुलफो की छाँव तले दिन बसर करे.!
ये घने बादलों की चादर बनी है बस मेरे लिए.!!


मेरे बिन कभी और की हो जाएगी मुम्मक़िन नहीं.!
ये ज़िंदगी तो बनी जान- ए- ज़िग्गर बस तेरे लिए.!!


दुप्पटे के कोने में मुँह छिपा क्यूँ शरमाती हो.!
ये शर्म-ओ-हया बनी है क्या बस एक मेरे लिए.!!


दिल की ना हो सकी गैर भी ना होना ख्वाहिश यही.!
तोड़ना ना दिल खुदा ने बक्शा हुस्न ‘सागर‘के लिए.!!


तेरा गैर संग बात करना गंवारा नहीं इस दिल को.!.jpg


Tera Gair Sang Bat Karna Ganwara Nahin Is Dil Ko.!


Bas Itana Jaanta Is Dharti Par Aayi Ho Mere Liye.!!


Kyun Aur In Jhulfo.n Ki Chanw Tale Din Basar Kare.!


Ye Ghane Badlon Ki Chadar Bani Hai Bas Mere Liye.!!


Mere Bin Kabhi Aur Ki Ho Jaayegi Mummqin Nahin.!


Ye Zindgi To Bani Hai Jaan-e-Jiggar Bas Tere Liye.!!


Duppate Ke Kone Mein Munh Chipa Kyun Shrmati Ho.!


Ye Sharm -o- Haya Bani Hai Kya Bas Ek Mere Liye.!!


Dil Ki Na Ho Saki Gair Bhi Na Hona Khwahish Yahi.!


Todna Na Dil Khuda Ne Baksha Husn’Sagar‘Ke Liye.!!


Written By Me On Jan 6, 2016 6:00 AM


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तेरा गैर संग बात करना गंवारा.!!