Thursday, December 28, 2017

होंठों पे मुस्कान लिए दूर बैठी…

क्यों आती है याद मुझ को तन्हाई में,
बेवफा मैं था तो भुलवा जाती मुझे.!



अपने होंठों पे मुस्कान लिए दूर बैठी,
मेरी ज़िन्दगी के दिन तो बता जाती.!!



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होंठों पे मुस्कान लिए दूर बैठी…

बातें हैं बातों का क्या.!!

किसी खूबसूरत धोखे से कम नहीं हैं तेरी मुहब्बत भरी बातें.!
लोग यूँही नहीं कहते”सागर“प्यार-वफ़ा बातें हैं बातों का क्या.!!



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बातें हैं बातों का क्या.!!

मगरूरियत रख अपने ही पास.!.!!

अपनी मगरूरियत को रख अपने ही पास.!



जब कभी नशा उतरे आ जाना”सागर“पास.!!



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मगरूरियत रख अपने ही पास.!.!!

“सागर”के पीछे कई तुझ-सी दीवानी.!!

इतनी भी हूर नहीं के तेरे दर पे जान दे दें.!



“सागर“के पीछे कई तुझ-सी दीवानी खड़ी.!!



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“सागर”के पीछे कई तुझ-सी दीवानी.!!

मुहब्बत की हद.!.!!

मत पूछ मेरी दीवानगी और मुहब्बत की हद.!
एक बार कह तो सही तेरे दर जान दे जाऊंगा.!!



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मुहब्बत की हद.!.!!