Wednesday, May 18, 2016

Why…?

मुहब्बत भी बड़ी अज़ीब होती है आप जाने हैं आपके महबूब ने आप से बेवफ़ाई कर दी है किन्तू आपका दिल है कि मानने को तैयार ही नहीं?वाह री मुहब्बत!!हो जाए तो इंसान के सर चढ़ बोलती है!
अर्ज़ है:-


Dekha Hai Zindagi Ko ‘Sagar‘,


Zindagi Ko Daga Dete.!


Yaar Log Phir Bhi Muhabbat Karte,


Zindagi Ko Kabhi Bewafa Na Kehte.!!


dekha hai.jpg


देखा है ज़िंदगी को ‘सागर‘,
ज़िंदगी को दगा देते.!


यार लोग फिर भी मुहब्बत करते,
ज़िंदगी को कभी बेवफा ना कहते.!!


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Why…?

Mistake.!! 

हम इंसानों की सबसे बड़ी कमी यही है कि हम हर बात में ईश्वर को ही कसूरवार ठहराने में लगे रहते हैं“फलाँ काम इसलिए नहीं हुआ क्यू कि खुदा की यही मर्ज़ी थी अथवा भगवान के आगे हम क्या कर सकते हैं“वग़ैरा-वग़ैरा…
काश हम वक़्त रहते अपनी बात अथवा अपना काम करने की आदत डालें?ईश्वर को दोष ना दें??“वो तो शरष्टी का निर्माता है वो तो सबके साथ सदैव रहता है!”
अर्ज़ है:-


वक़्त पर कुछ खुद कह ना सको,
बाद बयान करने का क्या फ़ायदा.!
खुदा को कसूरवार ठहराना आसान,
अपनी खता छुपाने से क्या फ़ायदा.!!


waqt.jpg


Waqt Par Kuch Khud Keh Naa Sako,


Baad Bayan Karne Ka Kya Fayda.!


Khuda Ko Kasoorwar Thehrana Aasan,


Apni Khta Chupaane Se Kya Fayda.!!



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Mistake.!!