Sunday, June 05, 2016

Zarurat.!!

हसीनों को होती ज़रूरत किताब की,
वादे याद रखने के लिए.!


दीवाने तो हर एक वादा मुज़बानी ही,
निभा जाया करते हैं.!



Haseenon Ko Hoti Zarurat Kitaab Ki,


Wade Yaad Rakhne Ke Liye.!


Deewane To Har Ek Wada Muzbani Hi,


Nibhaa Jaaya Karte Hain.!!


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Zarurat.!!

बेवफा नहीं हैं ‘सागर’.!!

आप कहते हैं मुहब्बत नहीं ? अब कैसे जतलायें…!!



कभी ज़िंदगी से उकता जाओ,
बेझिझक करीब चले आना.!


बेवफा नहीं हैं ‘सागर‘,
अपने आगोश में समा लेगा.!!


bewafa nahin.jpg


Kabhi Zindagi Se Ukta Jaao,


Bejhijhk Kareeb Chale Aana.!


Bewafa Nahin Hain ‘Sagar‘,


Apne Aagosh Mein Sama Lega.!!



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बेवफा नहीं हैं ‘सागर’.!!

आप से ऐसी उम्मीद ना थी…

अगर कोई आप से कुछ माँगता या कुछ कहता है तो वो आप पर बहुत यक़ीन करता होगा उसे आप पर पूरा भरोसा होगा कि चाहे कुछ भी हो जाए “आप अपना पूरा प्रयास करेंगे“!
आप खुसकिस्मत हैं कि


“आपको किसी के लिए कुछ कर गुज़रने का मौका मिला“?


पर आप हैं कि….
ज़रा उस वीर सैनिक के बारे में सौचिये “जो बिना मतलब या आरज़ू के आप की सरहदों की रक्षा रात-रात भर जाग कर करता है ताकि आप चैन से सौ सकें“!


बहुत इंतज़ार किया?एक हद होती है, अगर कोई काम कर नहीं सकते तो कम से कम करने का वादा तो ना करिए?हसीन सपनें ना दिखाइए!


“सपने जब टूटते हैं तो दर्द बहुत होता है“!


‘ज़िंदगी में किसी ने एक काम दिया और वो भी आप पूरा ना कर पाए?आप से ऐसी उम्मीद ना थी”!


यही वो हर मानस सौचता है जिसने किसी को किसी काम के लिए चुना होता है?


और अंत में कहेगा “Sorry आप को इस काम के लिए कहा था“?



क्या आप भी ऐसे ही हैं ज़रा सौचना??



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आप से ऐसी उम्मीद ना थी…