आज कल अख़बार,टीवी देखने का दिल नही करता,बहुत कम ऐसा होता है जब कोई जानूनी खबर देखने-सुनने को ना मिले?
रिश्तों का खून,यक़ीन का टूटना आम बात हो गयी है!और दर्द तो तब और भी बढ़ जाता है जब किसी अबला से संबधित खबर होती है?हम तरकी तो कर रहे हैं पर अपने संस्कारों की बलि चढ़ा कर?
हम जिसके लिए सारी दुनियाँ में विख्यात थे आज अपनी उन्हीं आदर्शों और मूल्यों की बलि चढ़ा रहे हैं!
अर्ज़ है:-
बिस्तर की सलवटें,
तकिये की चरमराई हालत,
सब कुछ बयान करती है.!
एक कली के,
फूल बनने की दास्तान,
सब को दिखाई देती है.!!
यक़ीन किया होगा उसने,
यक़ीन की हद तक.!
मुहब्बत में बेवफ़ाई की,
गुंजाइश कहाँ होती है.!!
खुदा का ख़ौफ़ खा,
परवाने इतरा ना इतना.!
शम्मा की चाह में,
जलने में ही भलाई होती है.!!
दो रास्ते जाते ज़िंदगी के,
एक रहा चलना होता.!
बुराई में तौहमत तो,
अच्छाई शौहरत देती है.!!
दो पल खुशी खातिर”सागर“,
वो मिटा देता एक अबलका को.!
गौर से देखता तो,
हर औरत में माँ होती है.!!

Bistar Ki Salwatein,
Takiye Ki Charmarai Halat,
Sab Kuch Bayan Karti Hai.!
Ek Kali Ke,
Phool Banne Ki Dastan,
Sab Ko Dikhaai Deti Hai.!!
Yaqeen Kiya Hoga Usne,
Yaqeen Ki Had Tak.!
Muhabbat Mein Bewafai Ki,
Gunjaish Kahan Hoti Hai.!!
Khuda Ka Khauf Kha,
Parwane Itra Na Itna.!
Shamma Ki Chaah Mein,
Jalne Mein Hi Bhalai Hoti Hai.!!
Do Raste Jaate Zindagi Ke,
Ek Raha Chalana Hota.!
Burai Mein Tauhmat To,
Achchai Shauhrat Deti Hai.!!
Do Pal Khushi Khatir”Sagar“,
Wo Mita Deta Ek Ablka Ko.!
Gaur Se Dekhta To,
Har Aurat Mein MaaN Hoti Hai.!!
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Source:: Mehfil101
हर औरत में माँ होती है.!!