आज हैं कल होंगे या जला-दफना दिए जाएंगे.!
किसी न किसी के अफ़साने अधूरे रह जाएंगे.!!
अजीब मंजर है और अजीब दुनिया का दस्तूर.!
आज अपने हैं कौन जाने कब बेगाने हो जाएंगे.!!
दिल पागल है लग जाता कभी-कहीं किसी से.!
उनको देने को शायरी के नज़राने रह जाएंगे.!!
वक़्त रहते दिल की हर बात जुबां पर लाओ.!
दिली ना कहना चाहने वाले बेगाने हो जाएंगे.!!
वक़्त की नज़ाकत को समझ नादान ‘सागर‘.!
एक बार गुज़रा तो जीने के बहाने रह जाएंगे.!!
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Source:: Mehfil101
जाने कब…