Sunday, May 22, 2016

Rubb-Di Saun…

शायरी करने का तब तक मज़ा नहीं आता जब तक की उस में पंजाब की खुश्बू ना हो?मुकम्मिल शायर वही जो पंजाबी मिट्टी की खुश्बू अपनी शायरी में महसूस करा सके! इक सोहना जया शेर उणा-दी शान इच…



ते फिर अर्ज़ कित्या हेगा:-



रुब्ब दी सौं अज तिक्र दिल नूं तेरे जया कोई विख्या न्यीं.!
हुरान इच हूर हैं तेरे जया दूजा दुनियाँ इच होर कोई न्यीं.!!


Rubb-di Saun.jpg


Rubb – Di Saun Aj Tikkar Dil Noon Tere Jayaa Koyi Vikhaya Nyin.!


Hooran Ich Hoor Hain Tere Jaya Duja Duniyan Ich Hor Koyi Nyin.!!


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Rubb-Di Saun…

तेरे बिन.!!

जब भी किसी जवान दिल को किसी से प्यार हो जाता है अक्सर उसके दिल-ओ-दिमाग़ पर बस एक यही ख़ौफ़ रहता है कि कहीं उसका महबूब उससे दूर ना हो जाए ना मिले?
अर्ज़ है:-


तेरे बिन जीने का तसवउर ही दिल दहला जाता है.!
वो दिन क़यामत का होगा जब हम-तुम जुदा होंगे.!!


tere bin.jpg


Tere Bin Jeene Kaa Tasvvur Hi Dil Dehala Jaata Hai.!


Wo Din Qayaamat Ka Hoga Jab Hum – Tum Juda Honge.!!


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तेरे बिन.!!

Guzaraati Kali…

इश्क़ ना कर गुज़राती कली से भंवरे,
सुना है हीरों के बाज़ार में मिट्टी का कोई मौल नहीं होता.!


जिनकी नज़रों में होती नोटों की खनक,
उनके लिए उलफत है खेल और मुहब्बत का मौल नहीं होता.!!



Ishaq Na Kar Guzraati Kali Se Bhanware,


Suna Hai Heeron Ke Bazar Mein Mitti Ka Koyi Maul Nahin Hota.!


Jinki Nazaron Mein Hoti Noton Ki Khanak,


Un Ke liye Ulfat Hai Khel Aur Muhabbat Ka Maul Nahin Hota.!!



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Guzaraati Kali…