शायरी करने का तब तक मज़ा नहीं आता जब तक की उस में पंजाब की खुश्बू ना हो?मुकम्मिल शायर वही जो पंजाबी मिट्टी की खुश्बू अपनी शायरी में महसूस करा सके! इक सोहना जया शेर उणा-दी शान इच…
ते फिर अर्ज़ कित्या हेगा:-
रुब्ब दी सौं अज तिक्र दिल नूं तेरे जया कोई विख्या न्यीं.!
हुरान इच हूर हैं तेरे जया दूजा दुनियाँ इच होर कोई न्यीं.!!

Rubb – Di Saun Aj Tikkar Dil Noon Tere Jayaa Koyi Vikhaya Nyin.!
Hooran Ich Hoor Hain Tere Jaya Duja Duniyan Ich Hor Koyi Nyin.!!
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Source:: Mehfil101
Rubb-Di Saun…
