Dedicated To My 1402 Followers.
This Is My First Gazal On WordPress 24th Jan 2009
I Think U Like It.
Thanks For Following Me.
आप सब ने जो हमें प्यार और सम्मान दिया उसका बहुत-बहुत शुक्रिया आगे भी इसी की उम्मीद है!
इन गुज़रे साढ़े सात सालों में यक़ीनन कुछ ग़लतियाँ भी हुई होंगी उनका तह दिल से हमें खेद रहेगा
इंसान हैं ना क्या करें? आपका ‘सागर‘
DILKASH SHAYARI
काली घटाओं से चाँद निकला,
झुल्फों को चेहरे से जो तुमने हटाया //
पत्थर भी आह – भर रह गये,
तब्बस्सुम को हमदम जो तुमने बनाया //
खाक हो गये फल्क़ के सितारे,
दिल में गर मुझे जो तुम ने बसाया //
खवाब अधूरे रह गये ज़हान के,
पलकों पर मुझे जो तुम ने सजाया //
हर तरफ़ मची दुहाई तुम्हारे नाम की,
हाल- ए-दिल सबको जो हम ने सुनाया //
प्यार में है बहुत दम सब कह उठे,
नगमा-ए-वफ़ा ‘सागर’ जब तुमने गया //
Kaali ghataon Se Chaand nikla,
Jhulfon ko chehre se jo tumne hataaya //
Paththar bhi aah-bhar raha gaye,
Tabbssum ko humdum jo Tumne banaya //
Khaak ho gaye Falaq ke Sitare,
Dil mein Gar Mujhe jo Tum ne busaya //
Khawab adhure rah gaye Zahan ke,
Palakon par Mujhe jo Tum ne sajaaya //
Har tarf muchi duhayi Tumhare naam ki,
Haal-e-Dil…
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Source:: Mehfil101
KHAK HO GAYEY SITARE