Sunday, May 28, 2017

Imtehaan…

हुस्न को अक्सर कदम-कदम पर इश्क़ को आज़माने की
आदत-सी होती,और इश्क़ बेचारा इम्तेहान देदे कर अपनी
वफ़ा साबित करता रहता,But…



“वक़्त तो हर किसी आता ही है ना?“


अर्ज़ किया है:-


अपने हाथों में सजाना मेरे नाम की मेहँदी.!
निखर जाए तो समझना मुझे तुझसे मुहब्बत.!!



Apne Hathon Mein Sajana Mere Naam Ki Mehndi.!


Nikhr Jaaye To Samjhna Mujhe Tujhse Muhabbat.!!


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Source:: Mehfil101


      



Imtehaan…

उनका तसव्वुर.!!❤️

चाहत को कभी भी शब्दों में ब्यान नहीं किया जा सकता…
इश्क़ छलकता है बताया नहीं जाता…
खैर छोड़िये…
वो जहाँ भी हों बस खुश हों…
जैसे भी हों खुश रहे…
ये ज़रूरी नहीं हर इंसान की हर मनचाही मुरादें पूरी हों…
अर्ज़ किया है:-



❤️


उनका तसव्वुर अब इस ज़िन्दगी के साथ ही जाएगा.!
जब तक धडकेगा दिल उनका नाम पुकारता जाएगा.!!❤️


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उनका तसव्वुर.!!❤️