वो जो लड़का है सुबहा-शाम छेड़ता है.!
जब जाती छत पर घूर – घूर तकता है.!!
वो जो लड़का है…
आते-जाते राहा में खड़ा रहता,
सखियों से हाल मेरा पूछता है,
बेशर्म-बेहया कम्बख़्त कहीं का,
सारे ज़हान में रुसवा करता है,
वो जो लड़का है…
ना धूप देखे और ना ही छाँव,
गर्मी हो या सर्दी चाहे बारिश,
रिझाने के कई नुस्खे अपनाता,
गली के चक्कर सौ लगाता है,
वो जो लड़का है…
जाने क्या दिल को होने लगा है,
उसका चक्कर लगाना भाने लगा,
इंतज़ार उसका रहता है दिल को,
मुझे भी अब पसंद आने लगा है,
वो जो लड़का है…
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Source:: Mehfil101
वो जो लड़का है…