हिन्दी देश में हिन्दी का सम्मान देखिए.!
इंग्लीश डे 364 हिन्दी दिवस मात्र एक.!!
दर्द जब दिल की बर्दाश से बाहर हो जाता है,
शब्द बन बाहर आता है,क्रोधित और अशांत मन से !
इसे दुर्भाग्य कहें या गुलामी की आदत
देश आज़ाद होने के लगभग ७० वर्षों बाद भी
अपनी भाषा अपना नहीं पाए?
“हिन्दी बोले-लिखने वाले को हीन नज़रों से देखा जाता है?”
क्यूँ?
एक सज्जन के रहे थे”आई लव हिन्दी“
काश वो बोलते-लिखते”हमें हिन्दी से प्रेम है“
अक्सर हिन्दुस्तानी पवित्र प्रेम की दुहाई देने वाले भी अपने
माशूक-माशूका(प्रेमी-प्रेमिका)कहते सुने जात है:
“आई लव यू“
साहेब अब तो प्यार भी अँग्रेज़ हो चला है?
काश कहते:
“तुमसे प्रेम है“
(समझते हैं अटपट्ता लगा होगा?)
चाइनीस चाइना वाले,स्पेनिश स्पेन वाले रूसी रूस वाले
कोरियन कोरिया वाले आदि-आदि
बोल-लिख स्पेस तक जा सकते हैं तो
हिन्दुस्तानी हिन्दी अपना क्यूँ नहीं?
हर किसी की भाषा अच्छी है मानते हैं !
परंतु हिन्दी भी कुछ कम नहीं?
फिर क्यूँ शर्म आती है बोलते-लिखते?
इंग्लीश ग्लोबल (सर्वसम्म्त भाषा)है किंतु इससे हिन्दी का
प्रभाव कम तो नहीं हो जाता?
अपनी अपनी समझ है आपनी-अपनी सौच परंतु दिल कहता है
“अपनी भाषा बोलने-लिखने से अपने राष्ट्र की पहचान बनती है”
जनाब जिसे करनी करनी है जिससे मुहब्बत करिए कौन रोकता है.!
यहाँ तो गर्व है अपने वतन हिंदुसतनी होने अपनी हिन्दी भाषा पर.!!
@Advo.R.R.’Sagar‘
Filed under:
Source:: Mehfil101
गर्व है हिन्दुस्तानी होने और हिन्दी भाषा पर.!!