Sad Ghazal on Gham in Love http://www.shayari.net/love/sad-ghazal-on-gham-in-love/
Source:: Mehfil101
Sad Ghazal on Gham in Love
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शरारत भी मियाँ अब तो सोच कर करते हो
ये कैसा बना लिया है आखिर तुमने खुद को
इतनी भी समझदारी अच्छी नहीं होती है
जीवन की राहें हमेशा कच्ची नहीं होती है
खुलकर जीना भी ज़रूरी है इस जहान में
कब तक क़ैद रहोगे तुम डर के मकान में
भरोसा जब टूटता है तो यकीनन दर्द होता है
पर हर दर्द में ही तो छुपा एक हमदर्द होता है
मोहब्बत भी मियाँ अब तो सोच कर करते हो
ये कैसा बना लिया है आखिर तुमने खुद को।
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