Friday, November 03, 2017

Bye Heart…!!

डॉक्टर्स कहते हैं उसे बल्ड कैंसर है,
कभी बुखार कभी दर्द और कभी जाने क्या-क्या…
कम्बख्त ज़िन्दगी इक बार ही हिसाब-किताब पूरा क्यों नहीं कर लेती…
वो गरीब भी है और इलाज़ वास्ते उसके पास ज्यादा रूपए भी नहीं,
क्या वो जीने की ज़िद्द छोड़ दे…
वो जानता है शायरी/बातों से पेट नहीं भरता…


ज़िन्दगी को लोग अपने-अपने नज़रिये से जीते हैं…
आपकी ज़िन्दगी है ख़ुशी से जियें उसे उसके हाल छोड़ दें…
इतना तो किसी के लिए किया ही जा सकता है…
कि यहाँ भी स्वार्थी होना पसंद करेंगे…
एक बार इंसानी जीवन मिला है आगे पता नहीं क्या…
जीने की आरज़ू किसे नहीं होती,
हर कोई इस रंगीन जहाँ में जीना चाहता है…
किसी का प्यार चाहता है और देना चाहता है…
पर ईश्वर/खुदा की मर्ज़ी आगे सब बेकार है…


अर्ज़ है:-


कभी चाह कर भी तुम्हारी तरह नहीं बन सकते.!
मुहब्बत तुझ से बेवफाई”सागर“कर नहीं सकते.!!



मैं भी जीना चाहता हूँ “सागर” इस जहाँ में,
कोई फरिश्ता नहीं के दिल के अरमान छुपा लूँ.!


फ़िरोज़ाबाद हो ग्वालियर या हो हैदराबाद,
यहाँ किसी शौख हसीना से अपना दिल लगा लूँ.!!


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Source:: Mehfil101


      



Bye Heart…!!

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