इक पागल-सी लड़की,
कभी लड़ती कभी बात करती.!
बड़ी मासूम है शायद,
फूलों से बेहतर चंदा-सी लगती.!!
हर रात जागती वो,
अपने खवाबों की ताबीर खातिर.!
इरादे बुलंद उसके,
कभी वार कभी तकरार करती.!!
उसके भी कुछ सपनें,
पंछी माफिक परवाज़ भरने के.!
खुले आस्मां की चाहत,
ज़िन्दगी को बहुत प्यार करती.!!
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Source:: Mehfil101
इक पागल-सी लड़की.!!
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