प्यार से उन्हें मोटी क्या कह बैठे.!
जनाब अपना खाना ही छोड़ बैठे.!!
पहला इश्क़ है जनाब-ए-आली का.!
छोटी – सी बात तभी दिल पर ले बैठे.!!
अज़ी ऐसी गुफ्तगू तो होती रहती.!
मुहब्बत से क्यों यूँ मुंह मोड़ बैठे.!!
क्या इतनी ही दिल्लगी है उनको.!
निगोड़ी किताबों से दिल लगा बैठे.!!
मोटी है या लंगड़ी-लूली सब मंजूर.!
रुह के खेल में आइना क्यों ला बैठे.!!
“सागर“की दिलरुबा जान-ए-बहार.!
क़बूल हो फिर क्यों शिकायत ले बैठे.!!
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Source:: Mehfil101
प्यार से उन्हें मोटी क्या कह बैठे.!!
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