Wednesday, December 27, 2017

शुक्र कर मुबारक दे गई…


क्यों हल्ला मचा रखा है,
नहीं आती ना आये,
शायद उसकी अम्मी ने,
उसे कहीं फसा रखा है…


भाई जवान छोरी है,
ब्याहने की उम्र भी,
मां ही फिक्र्र करेगी,
तो ही सूली चढ़ा रखा है…


कल कह तो रही थी,
ना आना पीछे मेरे,
अब रिश्ता कोई नहीं,
मौहल्ला क्यों उठा रखा है…


शुक्र कर मुबारक दे गई,
हुस्न क़ातिल होता,
परवाने हैं यही कहते,
शम्मा ने तो जला रखा है…


जन्म-दिन”सागर“का,
उसका क्या रिश्ता,
वैसे भी मगरूर गैर भी,
क्यों दिल पर लगा रखा है…


kiss


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Source:: Mehfil101


      



शुक्र कर मुबारक दे गई…

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