अपनी खताओं की सजा मुझको ना दे,
मैंने चाहा अपनी सांसों से बढ़.!
तेरी दोस्ती में ही ना अपनापन था कभी,
और तूने है मेरी तौहीन की.!!
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Source:: Mehfil101
अपनी खताओं की सजा मुझको ना दे.!!
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