आज जब रिश्तों को यक़ीन तोड़ते-टूटते देखता हूँ तो दिल में अजीब सा दर्द होता है!
क्यूँ अपने रिश्तों को जतलाने की ज़रूरत आन पड़ी
है?क्या हमारी मोरल वॅल्यूस कमजोर पड़ गयी हैं? ये वो मुल्क है जहाँ दोस्त की बहन-बेटी को अपनी बेटी-बहन,सहेली के भाई को भाई,चाचा-ताई,दादा-दादी,नाना-नानी,
यहाँ तक की पड़ोस के रिश्तों को भी एहमियत
दी जाती रही है पर आज?
अर्ज़ है:-
दिल के रिश्तों को तरज़ू में ना तौलिए,
बाज़ार में बिकता कोई सामान नहीं.!
माना आज रिश्तों का मौल ज़्यादा नहीं,
फिर भी इंसान से आगे कुछ और नहीं.!!

Dil Ke Rishton Ko Tarazu Mein Na Tauliye,
Bazaar Mein Bikta Koyi Saamaan Nahin.!
Maana Aaj Rishton Ka Maul Jyaada Nahin,
Phir Bhi Insaan Se Aage Kuch Aur Nahin.!!
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Source:: Mehfil101
Values Of Relationship…
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