जब बार-बार समझाने के बाद भी माशुका ना यक़ीन करे और ना ही इक़रार करे तो इसके सिवा
कोई और रास्ता ही नहीं बचता !
अर्ज़ है:-
इक तुझको ही चाहा है तेरी माँ की कसम,
ख़ाता तेरी कसम तो मानती ना उन के सर की कसम.!
नकद से मूल प्यारा होता तुमनें सुना होगा,
कर इक़रार वरना दूँगा होने वाली अपनी सास की कसम.!!

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Source:: Mehfil101
My Promise…
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