तू इबादत है मेरी तूँ ही पूजा मेरी,
मेरे मन-मंदिर में तेरी मूरत है सजी.!
फिर और किसी को सराहूं मैं कैसे,
क्यों गैर का बनाने पर तूं है अड़ी.!!
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Source:: Mehfil101
तू इबादत है मेरी…(Post No.300/Dec-2017)
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