देख तेरी बेरुखी ने क्या से क्या गुल खिला दिया.!
सीधे-सच्चे नाचीज़ “सागर” को शायर बना दिया.!!
बेशक गैर हो
(ग़ज़ल)

बेशक गैर हो साथ गुज़ारे लम्हें भुला ना पाओगे.!
दिल में बसी यादों को चाहा भी मिटा ना पाओगे.!!
बेशक गैर हो…
ज़िन्दगी में मुहब्बत इक बार ही हुआ करती है.!
चाहे किसी के हो जाओ वो प्यार न कर पाओगे.!!
बेशक गैर हो…
छिपाने से नहीं छिपती उल्फत की निशानियां.!
आ ज़नाज़े पे पलकों में अश्क़ ना रोक पाओगे.!!
बेशक गैर हो…
रिवाज़ों की परवाह कर हाल-ए-दिल ना सुनते.!
जान-ए-जहाँ बाद खुदा को क्या मुंह दिखाओगे.!!
बेशक गैर हो…
ना बनो “सागर” के अब कोई फर्क नहीं पड़ता.!
और के नाम हो जाओ बेवफा ही कह लाओगे.!!
बेशक गैर हो…
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Source:: Mehfil101
Good Bye Dear I’ll Miss U…
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