हम उनकी बेवफाई को,
मुहब्बत है समझते रहे.!
नादान थे यारो”सागर“,
पत्थर देवता समझते रहे.!!
पहला-पहल तजुर्बा था,
हम क्या जाने वफ़ा को.!
दुनियां समझाती रही पर,
हम खुद को हराते रहे.!!
कोई शिकयत न शिक़वा,
तन्हा सफर-ए-हयात करेंगे.!
वो चिराग सब भुजा गए,
दुआ में उनको मांगते रहे.!!
शर्त होती नहीं प्यार में,
वो शर्तों से प्यार करते रहे.!
ख्याल बन न आएं अब,
रातों को तभी जागते रहे.!!
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Source:: Mehfil101
वो शर्तों से प्यार करते रहे..!!
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