किस खातिर ये दिल सब से संभाल रखा है.!
कहीं”सागर“ख्यालों में बसा तो नहीं रखा है.!!
सब को मिलते हो पर उखड़े-उखड़े होकर.!
क्या राज है दिल में जो सबसे छिपा रखा है.!!
जगती आँखों से भी हसीँ खवाब देखा करो.!
पलकों में गर इस अज़ीज़ को सजा रखा है.!!
पास बैठ कभी दिल-ए-गुबार अपना निकाल.!
दिल किस कम्भखत के नाम धड़का रखा है.!!
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Source:: Mehfil101
कहीं”सागर”ख्यालों में बसा तो नहीं रखा है.!!
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