बहुत नाज़ था हजूर को दिल ना देने का,
ज़रा-सा नाराज़ क्या हुए दिल हार गए.!
रात-भर जागे हैं आहें भर-भर के सनम,
दिल तोड़ने की चाह में अपना तुड़ा गए.!!
“सागर“से उलझने का नतीजा यही होता,
पहले भी कई खुद का पागल बनवा गए.!
ऐसा नहीं के गरूर अपने पर”सागर“को,
दिल पे रख पत्थर आइना उन्हें दिखा गए.!!
प्यार अपनी जगह तक़रार अपनी जगह,
इज़्ज़त के क्या चीज़ बड़े हमें समझा गए.!
बड़ा है रब्ब बड़ा बोल कभी ना बोलिये,
खुशकिस्मत”सागर“बड़े खूब समझा गए.!!
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Source:: Mehfil101
बड़ा है रब्ब बड़ा बोल कभी ना बोलिये..!..!!
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