Monday, December 11, 2017

“सागर”से क्या खता हुई तकल्लुफ ही भूल बैठे.!!

मज़ाक को मज़ाक रहने दें,
हकीकत ना समझ बैठें.!
दो पल की ज़िन्दगी जानलो,
क्यों नाराज़ हो बैठे.!!


मानना है तो मान जाओ यूँ,
क्यों ज़िद्द कर बैठे.!
ज़रा सी मुहब्बत क्या जताई,
आप खुदा हो बैठे.!!


माना भँवरे बड़े मंडराने वाले,
पर क्यों फूल बन बैठे.!
सर्दी मौसम में जान-ए-जहाँ,
शोलों का शूल हो बैठे.!!


अभी तो शुरुवात ही हुई थी,
अंजाम तक पंहुच बैठे.!
“सागर“से क्या खता हुई जो,
तकल्लुफ ही भूल बैठे.!!



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Source:: Mehfil101


      



“सागर”से क्या खता हुई तकल्लुफ ही भूल बैठे.!!

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