वक़्त का धुंआं हूँ,
वक़्त साथ मिट जाऊँगा.!
यहाँ के रिश्ते-नाते,
सब यहीं छोड़ जाऊँगा.!!…
उम्र के दौर में,
बहुत कुछ चाहा है.!
चाहतें ये अपनी,
संग-संग ले जाऊँगा.!!…
होंगे कई शिक़वे,
शिकायतें भी यक़ीनन.!
जाते-जाते सारे,
गिले दूर कर जाऊँगा.!!…
मनचाहा ही मिलता,
सब कुछ नहीं जहाँ में.!
मुकम्मिल कुछ पर,
ख्वाहिशें साथ ले जाऊँगा.!!…
तराज़ू ना तोलना,
“सागर“की मुहब्बत को.!
वफ़ा में एक दिन,
जान अपनी दे जाऊँगा.!!…
Filed under:
Source:: Mehfil101
तराज़ू ना तोलना”सागर”की मुहब्बत को.!
No comments :
Post a Comment