इक पल की मुहब्बत ने जन्मों का दर्द दिया.!
उन्हें इतना चाहते गए कि जीना दुश्वार हुआ.!!
मैखाने जा भी कभी खुद को पिए ना समझा.!
उनकी आँखों में क्या देखा मन खुमार हुआ.!!
बहुत रुस्वा हुए साथी की इक झलक खातिर.!
बदनाम हुए तो क्या दिल को करार तो हुआ.!!
शादी सिर्फ दो जिस्मों का मिलन नहीं जानम.!
ये बंधन है जहाँ प्यार सांसों से बेशुमार हुआ.!!
फलसफां उल्फत के बहुत सुने थे मगर यारो.!
प्यार क्या तभी जान पाए”सागर“इकरार हुआ.!!
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Source:: Mehfil101
बंधन है जहाँ प्यार सांसों से बेशुमार हुआ.!!
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