Wednesday, October 25, 2017

तेरी इक ख़ुशी के पीछे मुझे मिले हैं हज़ारों गम.!!

तेरी इक ख़ुशी के पीछे मुझे मिले हैं हज़ारों गम.!
मिले मुझे ना फिर भी क्या खता हुयी थी सनम.!!


कोई चाहे किसी को जी भर और वो दूर हो जाए.!
क्यों शिकायतें इतनी क्यों मुहब्बत में इतने भरम.!!


तेरे पास आज सब कुछ मेरे पास बस तेरी यादें.!
तेरे दर से जब गुज़रूँ हरे हो जाएँ पुराने जख्म.!!


किसी देवता को गर पूजते वो भी जरूर मिलता.!!
क्यों फिर उम्र भर एक जिन्दा बूत के पीछे हम.!!


देख कर भी ना देखूं तेरे करीब कैसे न आऊं.!.
जो चिराग कभी जले थे वो कैसे हों जाएँ खत्म.!!


ख्वाहिशों की इंतहा”सागर“कभी होती नहीं पूरी.!
तेरे एक दीदार की खातिर सहै है लाखों सितम.!!



Filed under:

Source:: Mehfil101


      



तेरी इक ख़ुशी के पीछे मुझे मिले हैं हज़ारों गम.!!

No comments :