Monday, October 30, 2017

वो पीला सूट…


मुद्दत से तमन्ना है तुझ संग रूबरू हो बात करने की.!
तेरा-मेरा बेवक़्त आना-जाना कसक दिलमें छोड़ देता.!!


कभी तो वक़्त निकाल हाल-ए-दिल सुन-सुना अपना.!
कम्बखत तेरा इंतज़ार कोई और ख्याल आने नहीं देता.!!


जिक्र्र किया बार किया अपनी शायरी में तेरा.!
शर्म-औ-हया है जो होंठों पर इक़रार आने नहीं देता.!!


जान कर भी अनजान क्यों हुए बैठी है जान-ए-जहाँ.!
कोई और हसीन हुस्न आँखों में आने नहीं देता.!!


कहने को बहुत कुछ है पर पास है महज़एक तस्वीर.!


क्यों वो पीला सूट”सागर“को कोई रंग भाने नहीं देता.!!


Published
10/17/2017
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Source:: Mehfil101


      



वो पीला सूट…

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