Sunday, October 29, 2017

प्यार झुकता नहीं झुकाता”सागर”..!!

ना कोई वक़्त ना उम्र ना जाति-धर्म,
ना बोली भाषा का बंधन.!
प्यार तो एक बहती हवा जिसे बाँध,
सके ना कोई भी बंधन.!!


प्यार रांझे ने किया प्यार मीरा ने भी,
बहन का भाई कलाई बंधन.!
प्यार ने मुल्कों की सरहदें पार की,
डाल दिया जा अपना बंधन.!!


प्यार में इतनी कशिश रब्ब झुकाये,
करवाए वादों से बंधन.!
लड़ाई चाहे घर की या सरहदों की,
प्यार से अमन का बंधन.!!


प्यार झुकता नहीं झुकाता”सागर“,
प्यार में जन्मों का बंधन.!
दरिया का पानी “सागर” की और ,
प्यार रोक बांधे बंधन.!!



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Source:: Mehfil101


      



प्यार झुकता नहीं झुकाता”सागर”..!!

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