तेरे हाथों में रख दी ‘सागर‘ ने अपनी जान.!
जियाना चाहे तो जिया वरना मौत दिला दे.!!
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किसी के लिए तब बहुत मुश्किल होता है जब उसका
चाहने वाल उसी के शहर अथवा गली में रहता हो…?
अर्ज़ है:-
तेरे शहर से हूँ तेरे घर का पता भी जनता हूँ.!
कम्बख्त दिल तेरे घर जाने को नहीं मानता.!!
तुझे डर है तेरे शहर का नाम बता चुका हूँ.!
कहीं जहाँ को तेरे घर का पता ना बता दूँ.!!
अरे पागल वफ़ा करने वाले मरते-मरते भी.!
मुहब्बत को सरे बाजार रुस्वा नहीं करते.!!
किस स्कूल में टीचर है कहाँ से आती-जाती.!
सब जानता पर दूर-दूर से दीदार कर लेता.!!
हो जाए गर मुहब्बत तो यहाँ फूल भेज देना.!!
इतनी ना हो हिम्मत प्रोफइल पिक बदल लेना.!!
तेरी ख़ुशी तुझे मुबारक मुझे मेरे गम हैं प्यारे.!
दुआ यूँ ही खुशियों से तूँ लबरेज़ हो जी जाए.!!
ना बोलने की कसम तूने खाई सब जानता हूँ.!
‘सागर‘की भी कसम है कभी आवाज़ ना देगा.!!
# मेहबूब-मेहबूबा ज़माने की नज़र में अक्सर पागल ही होते हैं…
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Source:: Mehfil101
तुझे डर है कहीं तेरे घर का पता ना बता दूँ.!!
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