मुद्दत से तमन्ना है तुझ संग रूबरू हो बात करने की.!
तेरा-मेरा बेवक़्त आना-जाना कसक दिलमें छोड़ देता.!!
कभी तो वक़्त निकाल हाल-ए-दिल सुन-सुना अपना.!
कम्बखत तेरा इंतज़ार कोई और ख्याल आने नहीं देता.!!
जिक्र्र किया बार किया अपनी शायरी में तेरा “हाने“.!
शर्म-औ-हया है जो होंठों पर इक़रार आने नहीं देता.!!
जान कर भी अनजान क्यों हुए बैठी है जान-ए-जहाँ.!
कोई और फिरोजाबादी हुस्न आँखों में आने नहीं देता.!!
कहने को बहुत कुछ है पर पास है महज़ एक तस्वीर.!
क्यों वो पीला सूट “सागर” को कोई रंग भाने नहीं देता.!!
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Source:: Mehfil101
वो पीला सूट…
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