Thursday, May 25, 2017

You’re Mine…


यौवन की मद-मस्ती पर यूँ ना इतरा,
खुदा ने गर दिया संभाल ज़रा.!
यहाँ भँवरे फिरते हर गली चौराहे पर,
बाद में पछताने से बच ज़रा.!!
गदराई जवानी और सावन का महीना,
बारिश जिस्म ना भिगा ज़रा.!
सरे शहर बदनाम हो जायेगी सोहनिए,
यारों के क़त्ल ना कर ज़रा.!!
इस दिल की भी बन आती समझ यारा,
उठे कोई तुझ पे नज़र ज़रा.!
कैसे समझाऊँ दुनियां को ना देखे तुझे,
“सागर“नहीं तुझ बिन ज़रा.!!


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Source:: Mehfil101


      



You’re Mine…

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