दिल तो पागल है,दीवाना-मस्ताना…
जाने कब-कहाँ किस पर आ जाए…
ना भाषा की फिक्कर ना उम्र का बंधन,
ना धर्म-जाति उंच-नीच की चिंता…
मुहब्बत जब होती है किसीको किसीसे,
सर चढ़ बोलती है…
अर्ज़ किया है:-
तेरी शौख अदाओं ने तेरा दीवाना बनाया,
बता इस में मेरी खता क्या है.!
गुज़रूँ जिधर से भी मिलती हर राह पर,
वही जाने उसकी रजा क्या है.!!
Filed under:
Source:: Mehfil101
God Knows…
No comments :
Post a Comment