Tuesday, May 30, 2017

Feelings…By 💖💖…

हम चाहे कितने भी आज़ाद ख्याल हो जाएँ किन्तु,
यहां आज भी 80% लड़कियां अपने दिल की बात नहीं कह पाती…
इन्हें संस्कार कह लिए या हमरी सभ्यता का नाम दे दीजिये…
पुरुष तो खुले सांड माफिक है…?
क्यों क्या वही इंसान है?
उसी को मन-माफिक जीने का अधिकार मिला है?
गर कोई लड़की अपने मन की बात कह दे तो हंगामा मच जाता,
तरह-तरह के नाम रख दिए जाते,
उसके परिवार को तिरस्करत किया जाता भाई क्यों…?
हम शायरों ने अक्सर शम्मा की तुलना माशूका(लड़की)
से की है और परवाने का नाम माशूक(लड़का)को दिया,
शायर कहते…



परवाना जल गया शम्मा जलती रही.!
अपने आशिक को जलते देखती रही.!!


ज़रा सोचिये कौन दीवाना(महन)है जो जल गया वो या जो
अपनेआशिक को जलते देखता है और फिर भी रोशन है…


परवाना तो जल तबाह हो सुना जाता दिल का हाल.!
शम्मा जलती ख़ामोशी से फिर भी बदनाम हो जाती.!!



जहान(अपने परिवार खातिर)को रोशन करने वास्ते…?
लड़कियों को कब मिलेगी पूरी आज़ादी खुली हवा में साँस
लेने की…
माना कोशिश हो चुकी हैं पर सफर अभी बहुत लम्बा है…


दिल दुखता ‘सागर’ ये देख कर,
हम ब्यान कर जाते हाल-ए-दिल अपना.!
वो मुहब्बत कर कर भी हम से,
कभी राज़ – ए – दिल कह पाते न अपना.!!


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Source:: Mehfil101


      



Feelings…By 💖💖…

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