Saturday, May 27, 2017

Expensive Water…

जो दिख रहा है वही बिक रहा है.!
आज कल यही चलन चल रहा है.!!


ज़माना गुज़रा जब गुणों की बात थी.!
खंडहरों पर रंग – रोगन लग रहा है.!!


सर पे ओड ओढ़नी मिलती सजनी.!
पूरब में सूरज पश्चिम निकल रहा है.!!


अच्छा कमाऊ बालक इतराने लगा.!
उनकी कमाई घर बसाने चल रहा है.!!


गुलबदन हुस्न -ए -जाना की चाहत ना है.!
वफ़ा व्यापार हो चली प्यार बिक रहा है.!!


संस्कृति-सभ्यता की फिक्र किसे’सागर‘.!
आज खून से महंगा पानी हो रहा है.!!



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Source:: Mehfil101


      



Expensive Water…

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