आप कहाँ है और किस हाल में हैं
यहाँ किसी को नहीं फिक्कर!
दुनियाँ ना पहले कभी किसी के लिए
रुकी-थमी है ना अब रुकेगी?
वैसे भी आम इंसान की फिक्कर ही
किसे है?
अर्ज़ किया है:-
छुप गया हूँ किधर,
कहाँ और क्यूँ – कैसे,
इक बार आकर तो पूछते.!
ज़िंदगी इतनी सस्ती नहीं,
कि अपने भुलाए जायें,
साथी यूँ ऐसे नहीं रूठते.!!
Chup Gaya Hun Kidhar,
Kahan Aur Kyun-Kaise,
Ik Baar Aa Kar To Poochate.!
Zindagi Itni Sasti Nahin,
Ki Apne Bhulaye Jayein,
Sathi Yun Aise Nahin Ruthate.!!
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Source:: Mehfil101
दुनियाँ पहले कभी किसी के लिए रुकी है??
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