ज़िंदगी में हर इंसान से कुछ ना कुछ ग़लती हो ही जाती है!
ज़रूरी नहीं की जो आपने देखा समझा वही सही हो?
दो जनों की आपस में एक सोशियल साइट पर बड़ी बनने लगी,
अक्सर दोनों घण्टों आपस में बतियाते रहते!
लड़की को पता चला लड़का उसकी जाति का है फिर क्या था,
उसकी दिलचस्पी और भी बाद गयी!
ऊपर से सोने पर सुहागा”लड़का लड़की के शहर का ही निकला!
एक दिन लड़के ने लड़की एक बात शेयर करदी !
लड़की उससे नाराज़ और दूर हो गयी
“ये सौच शायद लड़का उसकी बातें सब को बता सकता है!“
बिन सौचे-समझे और पूछे!
इसे उसके यक़ीन की कमी कहें या नासमझी या जल्द बाजी?
हो सकता है वो सही भी हो पर क्या ये ज़रूरी है?
“जनाब मुहब्बत में यक़ीन ज़रूरी होता गर कहीं शक-शुभा हो
पूछ लेना चाहिए?
“ग़लतफ़हमियाँ रिश्ते तोड़ती ही हैं जोड़ती नहीं?“
कोई आपको कितने मौके दे सकता है?एक-दो-तीन…?
“That’s Enough…”
शायर मन ने ऐसी ही समस्या / वकीये को ध्यान में रख
ग़ज़ल अर्ज़ की है:-

बहुत कुछ था पिछले साल जो तुम्हें,
अच्छा ना लगा हमें अच्छा ना लगा.!
पीछे छोड़ देते सब बातें जो तुम्हें,
अच्छी ना लगी हमें अच्छी ना लगी.!!
नया साल नयी शुरुवत कर लेते हैं,
जो दिल को रास आए मन को भी भाए.!
कहना तुम्हें भी होगा हमें भी,
दिन कैसा है गुज़रा साल कैसा लगा.!!
गर दिल को कोई चोट पहुँचाई है तो,
तुम हमें माफ़ करो हम तुम्हें.!
फिर ना कहना’सागर‘तुमने बात ना की,
अच्छा ना किया दिल को अच्छा ना लगा.!!

Bahut Kuch Tha Pichale Saal Jo Tumhein,
Achcha Na Laga Humein Achcha Na Laga.!
Piche Chod Dete Sab Baatein Jo Tumhein,
Achchi Na Lagi Humein Achchi Na Lagi.!!
Naya Saal Nayi Shuruvat Kar Lete Hain,
Jo Dil Ko Raas Aaye Man Ko Bhi Bhaaye.!
Kehna Tumhein Bhi Hoga Humein Bhi,
Din Kaisa Hai Guzara Saal Kaisa Laga.!!
Gar Dil Ko Koyi Chot Pahunchai Hai To,
Tum Humein Maaf Karo Hum Tumhein.!
Phir Na Kehna’Sagar‘Tumne Baat Na Ki,
Achcha Na Kiya Dil Ko Achcha Na Laga.!!
Filed under:
Source:: Mehfil101
Last Chance…
No comments :
Post a Comment