हम इंसानों की सबसे बड़ी कमी यही है कि हम हर बात में ईश्वर को ही कसूरवार ठहराने में लगे रहते हैं“फलाँ काम इसलिए नहीं हुआ क्यू कि खुदा की यही मर्ज़ी थी अथवा भगवान के आगे हम क्या कर सकते हैं“वग़ैरा-वग़ैरा…
काश हम वक़्त रहते अपनी बात अथवा अपना काम करने की आदत डालें?ईश्वर को दोष ना दें??“वो तो शरष्टी का निर्माता है वो तो सबके साथ सदैव रहता है!”
अर्ज़ है:-
वक़्त पर कुछ खुद कह ना सको,
बाद बयान करने का क्या फ़ायदा.!
खुदा को कसूरवार ठहराना आसान,
अपनी खता छुपाने से क्या फ़ायदा.!!

Waqt Par Kuch Khud Keh Naa Sako,
Baad Bayan Karne Ka Kya Fayda.!
Khuda Ko Kasoorwar Thehrana Aasan,
Apni Khta Chupaane Se Kya Fayda.!!
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Source:: Mehfil101
Mistake.!!
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