आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो
निगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़
ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो
मेरे बहते आंसुओ की कोई कदर नहीं
क्यों इस तरह नजरो से गिरा देते हो
क्या यही मौसम पसंद है तुम्हे जो,
सर्द रातो में आंसुओ की बारिश करवा देते हो
तीर दर्द का सा लगता है सीने में मेरे
जब कांपता देख भी तुम मुस्कुरा देते हो
लोग तो मुर्दे को भी सीने से लगा कर प्यार करते हैं
फिर क्यों मेरे करीब आकर तुम हर बार ज़ख्म नया देते हो
आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो
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Source:: Mehfil101
आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो
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