दर्द-ए-दिल बयान करने वास्ते ज़रूरी नहीं पूरा इशतहार
लिखा जाए!
दो लाइन्स ही काफ़ी हैं हाल-ए-दिल बताने के लिए!
अर्ज़ है:-
ये मुहब्बत की इंतहाँ थी,
जिसे चाहा वही बिछड़ गया.!
‘सागर‘जिसे तस्व्वुर में रखा,
और का खवाब बन गया.!!

Ye Muhabbat Ki Intahaan Thi,
Jise Chaha Wahi Bichad Gaya.!
‘Sagar‘Jise Tasvvur Mein Rakha,
Aur Ka Khawaab Ban Gaya.!!
Filed under:
Source:: Mehfil101
Painful Limit…
No comments :
Post a Comment