Saturday, October 22, 2016

बेताब नज़र.//

उनके ख्यालों खोकर चलो’सागर‘,
कुछ लिख लेते हैं.!
इक ग़ज़ल लिखते हैं और उनको,
याद कर लेते हैं.!!


अर्ज़ है:-



साजन की गली कभी तो आया करो.!
बेताब नज़र को दीदार कराया करो.!!



खूबसूरत हो माना ए हुस्न के मसीहा.!
यूँ अपनी इबादत ना करवाया करो.!!



वादा करते हो सही वक़्त नहीं आते.!
तल्बगार को इंतज़ार ना कराया करो.!!



यूँ इतराने की अदा मगरूर बनाती है.!
खुदा वास्ता गरूर ना फरमाया करो.!!



उलफत में लुका – छुपी अच्छी नहीं.!
प्यार गर’सागर‘से ना शरमाया करो.!!



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Source:: Mehfil101


      



बेताब नज़र.//

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