ज़िंदगी में आप किसी के विचारों से इतेफ़ाक़ रखते हों या नो हों परंतु आप जब भी उनसे मिलें ऐसे मिलें उन्हें एहसास ना आप उन्हें पसंद नहीं करते,उन्हें या उनके विचारों को?
“अगर हम किसी को खुशी दे नहीं सकते तो हमें दुख देने का भी हक़ नहीं है“
खैर छोड़िए !
अर्ज़ है:-
बेहया करती नहीं इंतज़ार किसी के अधूरे काम पूरे करने का.!
मौत आती है अचानक और बिन सौचे-समझे साथ ले जाती है.!!

Behaya Karti Nahin Intzaar Kisi Ke Adhure Kaam Poore Karne Ka.!
Maut Aati Hai Achanak Aur Bin Sauche-Samjhe Saath Le Jaati Hai.!!
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Source:: Mehfil101
Have a Nice Journey…
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